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  • अद्भुत है मण्डोर उद्यान की देवताओं की साल

     01.09.2019
    अद्भुत है मण्डोर उद्यान की देवताओं की साल

    भारत में वीर पुरुषों को देवी-देवताओं के समकक्ष पूजे जाने की परम्परा प्राचीन समय से है। मारवाड़ राज्य में भी वीर-पुरुषों को लोक देवता मानकर उनकी पूजा की जाती थी। गौ, स्त्री, निर्बल, ब्राह्मण, प्रजा, शरणागत एवं धरती की रक्षा करते हुए जो वीर पुरुष अपना जीवन बलिदान करते थे, उन्हें लोकदेवता की तरह पूजा जाने लगता था।

    जोधपुर नगर से बाहर स्थित मण्डोर उद्यान परिसर में देवताओं की साल नाम से एक अद्भुत मंदिर स्थित है जिसे देवताओं की साल कहा जाता है।

    साल उस गलियारे को कहा जाता है जिसका निर्माण एक लम्बे बरामदे के रूप में किया जाता है। मण्डोर स्थित देवताओं की साल का निर्माण महाराजा अजीतसिंह और उसके पुत्र राजा अभयसिंह के काल में करवाया गया।

    महाजारा अजीतसिंह ने ई.1707 से ई.1724 तक तथा उनके पुत्र अभयसिंह ने ई.1724 से 1749 तक मारवाड़ राज्य पर शासन किया जिसे जोधपुर राज्य भी कहा जाता था।

    बड़ी-बड़ी देव मूर्तियों को चट्टान पर उत्कीर्ण करने से पूर्व छोटे-छोटे प्रस्तर खण्डों पर इनके नमूने बनाये गये थे।

    ये नमूने मण्डोर के राजकीय संग्रहालय में रखे हुए हैं। इस देवशाला में तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास स्थान बनाया गया है।

    एक विशाल चट्टान को काटकर 16 विशाल मूर्तियां बनाई गई हैं जिनमें चामुण्डा, महिषासुर मर्दिनी, जालंधर नाथ, गुसाई, रावल मल्लीनाथ, पाबू, रामदेव, हडबू, जांभा, नेहा और गोगा आदि देवी-देवताओं और महापुरुष सम्मिलित हैं।

    गणेशजी, पार्वती सहित शिवजी, गोवर्धनधारी कृष्ण, राम दरबार, अश्वारूढ़ सूर्य तथा पंचमुखी ब्रह्माजी की मूर्तियां भी अनोखी हैं। ब्रह्मा को ब्रह्माणी के साथ दिखाया गया है जिनके दूसरी तरफ बहमाता पुत्र सहित उपस्थित है।

    लोक देवताओं के सिर पर अलग-अलग विधा की पगड़ियां बान्धी गयी हैं।

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