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  • पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 9

     03.06.2020
    पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 9

    ई.1941 में पाकिस्तान की मांग और पुष्ट हो गयी-

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    मुस्लिम लीग के ई.1941 में मद्रास में आयोजित वार्षिक सत्र में पाकिस्तान की मांग और भी जोरदार तरीके से की गयी। इस सत्र में जिन्ना द्वारा इस मांग की विस्तृत व्याख्या भी की गयी। उसने कहा कि ऑल इण्डिया मुस्लिम लीग का लक्ष्य है कि हम भारत के उत्तर-पश्चिम और पूर्वी क्षेत्रों में पूर्ण रूप से स्वतंत्र, अलग राष्ट्र की स्थापना करें जिसमें रक्षा, विदेश मामलों, संचार, कस्टम, मुद्रा विनिमय आदि पर पूरा हमारा नियंत्रण रहेगा। हम किसी भी परिस्थिति में एक केंद्रीय सरकार के साथ संपूर्ण भारतीय संविधान नहीं चाहते। हम इसके लिये कभी सहमत नहीं होंगे।

    जिन्ना ने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया-

     जब ई.1942 में कांग्रेस ने भारत छोड़ो आंदोलन आरंभ किया तो जिन्ना ने कांग्रेस के खिलाफ असभ्य भाषा में भाषण दिये। जब गांधीजी ने मुंबई में कहा कि उन्हें आज रात ही आजादी चाहिये तब जिन्ना ने मुसलमानों का आह्वान किया कि वे भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध करें। इस आंदोलन का विरोध करने के लिये मुस्लिम लीग प्रेस ने इस पूरे आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन से लड़ रहे कांग्रेसियों को "गुण्डे" शब्द से संबोधित किया। कांग्रेस नेताओं के खिलाफ उतनी सख्त बातें ब्रिटिश प्रेस ने भी नहीं कीं जितनी मुस्लिम लीग प्रेस ने कहीं।

    पण्डित नेहरू को राजनीति में नहीं देखना चाहता था जिन्ना-

    लैरी कालिंस एवं दॉमिनिक लैपियर ने अपनी पुस्तक फ्रीडम एट मिडनाइट में लिखा है- जवाहरलाल नेहरू के बारे में जिन्ना के मन में आक्रोश ही आक्रोश था। वह नेहरू के बारे में कहा करता, "यहाँ राजनीति में नेहरू का क्या काम? जाएं अंग्रेजी के प्रोफेसर बनें। खिसकें। साहित्यकार हैं। राजनीति में घुसे आ रहे हैं। घमण्डी ब्राह्मण हैं। पश्चिमी पढ़ाई लिखाई का बाना जरूर पहन लिया लेकिन अंदर से मक्कार..... हैं।

    गांधीजी को तनिक भी सहन नहीं करता था जिन्ना-

    लैरी कालिंस एवं दॉमिनिक लैपियर ने अपनी पुस्तक फ्रीडम एट मिडनाइट में लिखा है- एक बार गांधीजी किसी वार्ता के लिये जिन्ना के निवास स्थान पर गये। मध्यांतर हुआ तो गांधीजी जिन्ना के बहुमूल्य पर्शियन कालीन पर लेट गये और अपने पेट पर मिट्टी रख ली। इस दृश्य को जिन्ना कभी भूल नहीं सका, कभी माफ नहीं कर सका। कम से कम दो बार जिन्ना को कांग्रेस के सार्वजनिक मंच से इसलिये भगाया गया क्योंकि कांग्रेसी सदस्य चाहते थे कि जिन्ना गांधीजी को महात्मा कहकर सम्बोधित करे जबकि जिन्ना उन्हें "मिस्टर घैण्ढी" कहकर ही सम्बोधित करता था।

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

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