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  • पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 8

     03.06.2020
    पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 8

    ई.1940 में पाकिस्तान का प्रस्ताव पारित हुआ-

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    ई. 1940 में रहमत अली ने "इस्लाम की मिल्लत और भारतीयता का खतरा" शीर्षक से एक इश्तहार प्रकाशित किया। इस इश्तहार में उसने कहा कि मुसलमानों को अलग राष्ट्र के निर्माण का प्रयास करना चाहिये। रहमत अली ने "इण्डिया" शब्द के अंग्रेजी अक्षरों में हेरफेर करके "दीनिया" शब्द का निर्माण किया जिसका अर्थ होता था- एक ऐसा उपमहाद्वीप जो इस्लाम में धर्मांतरित होने की प्रतीक्षा कर रहा था। रहमत अली ने बंगाल व आसाम का पुनः नामकरण करते हुए उसे "बंग ए इस्लाम" नाम दिया।

    इस नाम का अर्थ था "इस्लाम का बंगुश"। बंगुश बंगाल का एक मुगल सामंत था। रहमत अली ने बिहार का नाम फरूखिस्तान, उत्तर प्रदेश का नाम हैदरिस्तान तथा राजपूताना का नाम मोइनिस्तान रखा। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के नाम पर मोइनिस्तान की कल्पना की गयी। उसने हैदराबाद का नाम ओसमानिस्तान रखा। रहमत अली की परिकल्पना इतनी सफल हुई कि दिसम्बर 1940 में अपने लाहौर अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया जिसमें कहा गया कि मुसलमानों को तब तक कोई संवैधानिक योजना स्वीकार नहीं होगी जब तक उसे इन मूल सिद्धांतों पर तैयार न किया गया हो। जिन क्षेत्रों में मुसलमान बहुमत में हैं, जैसे भारत के उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी अंचलों में उन्हें संगठित करके आठ स्वतंत्र देशों के रूप में संगठित किया जाना चाहिये जिसमें घटक इकाइयाँ स्वतंत्र और प्रभुत्व संपन्न होंगी।

    के. एम. मुंशी ने अपनी पुस्तक पिलग्रिमेज टू फ्रीडम में लिखा है कि इसके तुरंत ही पीछे मुस्लिम लीग के नेताओं ने, जहाँ जहाँ भी उनसे हो सका, बलवे कराने आरंभ कर दिये। ढाका, अहमदाबाद, बम्बई के बलवे तो अधिक भयंकर हुए थे।

    लिनलिथगो ने उठाया फायदा

    कांग्रेस भारत की आजादी की मांग कर रही थी और उसकी मांग को न केवल पूरे भारत में अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिल रहा था। इस मांग का एक ही अर्थ था कि अंग्रेज सरकार कांग्रेस को सत्ता सौंप कर यहां से चली जाये किंतु मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग का फच्चर फंसा देने से तत्कालीन वायसराय लार्ड लिनलिथगो ने अगस्त 1940 के अपने प्रसिद्ध प्रस्ताव में भारत से कहा- बिना कहे यह स्पष्ट है कि ब्रिटिश सरकार भारत की शांति और कल्याण की अपनी वर्तमान जिम्मेदारियां किसी ऐसी सरकार को नहीं सौंप सकतीं जिसके प्रभुत्व को भारत के राष्ट्रीय जीवन में विशाल और महत्वपूर्ण तत्वों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया हो। वायसराय लार्ड लिनलिथगो की इस घोषणा से मुस्लिम लीग को अपनी पाकिस्तान की मांग के प्रति नैतिक समर्थन मिल गया।

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