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  • पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 1

     03.06.2020
    पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 1

    हमारी नई वैबसाइट - भारत का इतिहास - www.bharatkaitihas.com

    पाकिस्तान का जन्म नफरत, हिंसा, रक्तपात और दंगों के बीच हुआ था। इतिहास गवाह है कि पिछले 70 वर्षों में पाकिस्तान में हिन्दुस्तान के विरुद्ध नफरत और बैर पलता रहा है। पाकिस्तान के शिक्षकों ने मदरसों में बच्चों की पुस्तकों में भारत के विरुद्ध नफरत का पाठ पढ़ाया। पाकिस्तान के सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में भारत को शत्रु राष्ट्र के रूप में चित्रित किया गया। पाकिस्तान के नेताओं ने भारत के विरुद्ध अनर्गल दुष्प्रचार करके चुनाव लड़े और सरकारें बनायीं। पाकिस्तान ने भारत पर साढ़े तीन युद्ध थोपे। पहला 1948 में, दूसरा 1965 में, तीसरा 1971 में और साढ़े तीनवां 1999 में, कारगिल में। पाकिस्तान के आतंकवादी भारत में कहर ढाते रहे हैं। हरी-भरी कश्मीर घाटी को पाकिस्तानी नफरत ने खून से लाल कर दिया। जहां नफरत की खेती की जाती है, वहां पतन और विनाश की फसल पैदा होती है। आज पाकिस्तान अपने पाले हुए आतंवादियों की चपेट में है। विशेषज्ञों की भविष्यवाणी है कि आने वाले समय में तालिबान पाकिस्तान को निगल जायेगा। जिस आतंकवादी गुट के हाथ भूमि का जो टुकड़ा लगेगा, वह अलग देश के रूप में स्वतंत्र हो जायेगा। अभी तक एक ही राष्ट्र हमें पश्चिम की ओर से शत्रु की तरह देखता था किंतु यह भविष्यवाणी सही सिद्ध हुई तो पश्चिमी सीमा पर हमें दुश्मनी भरी निगाह से देखने वाले पांच या छः देश हो जायेंगे। पाकिस्तान की इस दुखःद त्रासदी पर की पृष्ठभूमि पर यह पुस्तक लिखी गई है जो उस समय के कुछ ऐसे दृश्यों से साक्षात्कार करवाती है जिनकी पृष्ठभूमि में भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान अस्तित्व में आया।

    - डॉ. मोहनलाल गुप्ता

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  • पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 2

     03.06.2020
    पाकिस्तान का संक्षिप्त इतिहास . 2

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    पहली और आखिरी इच्छा - शांति की स्थापना !

    भारत हजारों साल पुराना देश है जिसका निर्माण प्रकृति की सीमाओं से नहीं अपितु संस्कृति की सीमाओं से हुआ था। जहां तक वेदों की ऋचायें गूंजती थीं तथा सुरों अर्थात् देवताओं की पूजा होती थी, वहां तक भारत की सीमायें लगती थीं। भारत की पश्चिमी सीमा के पार रहने वाले लोग असुरों की पूजा करते थे और अहुरमज्दा पढ़ते थे। पौराणिक युग में जहां-जहां तक रामकथा तथा महाभारत की कथा का प्रसार हुआ, वहां-वहां भारत से गये राजकुमारों ने अपने-अपने शासन स्थापित किये। उन देशों में भारतीय संस्कृतिक अपना ली गई। सिकंदर के भारत आक्रमण के समय अर्थात् आज से दो हजार तीन सौ सैंतीस साल पहले, भारत की सीमायें हिन्दुकुश पर्वत से प्रारंभ होकर बर्मा के अंतिम छोर तक जाती थीं। पश्चिम दिशा में भारत का पड़ौसी पर्शिया अर्थात् फारस हुआ करता था। उस समय का पर्शिया आज का ईरान है। ईसा के जन्म से 624 साल पहले महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ। उन्होंने पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया। पश्चिम में ये संदेश हिन्दुकुश पर्वत के इस पार तक सीमित रहे जबकि उत्तर में तिब्बत और चीन, पूर्व में बर्मा, थाईलैण्ड, जावा, सुमात्रा, बाली, बोर्नियो, इण्डोनेशिया, सुमाली, आदि देशों तक गये। दक्षिण में श्रीलंका ने महात्मा बुद्ध के उपदेशों को ग्रहण किया। जहां-जहां तक महात्मा बुद्ध के संदेश गये, वहां-वहां तक भारतीय संस्कृति का प्रसार हुआ। इस दृष्टि से इन्हें सांस्कृतिक भारत मानना चाहिये। वर्तमान समय में ईरान से बर्मा तक के क्षेत्र में सात देश स्थित हैं। इनमें से पहला अफगानिस्तान, दूसरा पाकिस्तान, तीसरा भारत, चौथा भूटान, पांचवा नेपाल, छठा बांगलादेश और सातवां म्यानमार है जबकि तिब्बत चीन में विलुप्त हो चुका है। श्रीलंका भी किसी समय भारत का हिस्सा था। औरंगजेब के समय तक अफगानिस्तान भारत का हिस्सा था किंतु अंग्रेजों के भारतीय राजनीतिक आकाश में ताकतवर बनकर उभरने से काफी पहले वह भारत से अलग हो चुका था। अफगानिस्तान में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बनायी हुई गुफायें तथा उनमें उकेरी गयी भगवान बुद्ध की मूर्तियां अभी तक मौजूद हैं जिन पर कुछ दशक पहले तालिबानी आतंकवादियों ने तोपों से गोले बरसाकर बर्बाद कर दिया। आम अफगानी आज भी हिन्दी भाषा बोलता है। बर्मा और श्रीलंका हमसे अंग्रेजों के शासन में अलग हुए किंतु पाकिस्तान और बांगलादेश हमसे ठीक उस दिन अलग हुए जिस दिन अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना था। पाकिस्तान और बांगलादेश भारत से, दो टुकड़ों वाले एक देश के रूप में अलग हुए थे जिनमें से एक टुकड़े को पश्चिमी पाकिस्तान कहा जाता था तो दूसरे टुकड़े को पूर्वी पाकिस्तान। बाद में ये दोनों टुकड़े भी आपस में झगड़ कर दो राष्ट्रों के रूप में अलग हुए। भारत से पाकिस्तान का अलग होना मानवीय इतिहास की एक क्रूरतम और रक्तरंजित घटना है। संसार के कई अन्य देशों को भी ऐसी भीषण त्रासदियां झेलनी पड़ी हैं किंतु भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय जो कुछ हुआ, वह केवल इसी मानवीय मनोविज्ञान का परिणाम था कि सभ्यता के कैनवास पर मनुष्य सदैव एक नादान और जिद्दी बच्चे की तरह व्यवहार करता है। नयी जीत की आशा में वह पुरानी उपलब्धियों को आग में झौंक डालता है। मनपसंद खिलौना प्राप्त करने की प्रत्याशा में वह अपनी हथेली पर रखे खिलौने को क्रूरता से तोड़ डालता है। विभाजन के सड़सठ साल बाद भी हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई। हम आज भी अच्छे पडौसी नहीं बन सके। पूरी दुनिया हमारा तमाशा देखती रही और हम अपने नागरिकों को आतंकी हमलों की आग से बचाने के लिये पाकिस्तान से समझदारी की उम्मीद लगाये बैठे रहे। क्या पाकिस्तान से उस समझदारी की आशा की जानी चाहिये थी जो भारत और पाकिस्तान को दो अच्छे पड़ौसियों के रूप में स्थापित होने में सहायता कर सकती! भारत ने अपनी ओर से समझदारी दिखाने के लिये क्या कुछ नहीं किया! सीमापार से लगातार हो रहे आतंकी हमलों और वहां से आ रही नकली मुद्रा के बावजूद भारत ने पाकिस्तान के साथ सदाशयता भरा व्यवहार किया है और अपने राजनयिक सम्बन्ध बनाए रखे हैं। पाकिस्तान की नींव ही झगड़े से पड़ी थी। ई.1908 में भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना हुई, तब से लेकर 1947 तक मुस्लिम लीग पाकिस्तान के लिये झगड़ती रही और उसे लेकर ही रही। इस पुस्तक में उस झगड़े की एक झलक भर है। इसे लिखने का उद्देश्य केवल इतना है कि हम इतिहास के उन पन्नों को टटोल कर देखें जिनसे भविष्य के लिये ऐसा सबक लिया जा सके कि, हम उन नादानियों को न दोहरायें तथा अच्छे पड़ौसियों की तरह शांति से रह सकें। आम भारतीय की पहली और आखिरी तमन्ना शांति की स्थापना ही है।

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