Blogs Home / Blogs /
  • जोधपुर में उड्डयन के जनक महाराजा उम्मेदसिंह

     07.06.2017
    जोधपुर में उड्डयन के जनक महाराजा उम्मेदसिंह

    महाराजा उम्मेदसिंह और वायुयान में परस्पर विशेष सम्बंध दिखाई देता है। जिस वर्ष संसार में पहले वायुयान ने हवा में पहली उड़ान भरी, उसी वर्ष महाराजा उम्मेदसिंह का जन्म हुआ। जिस वर्ष वायुयान ने दुनिया का पहला चक्कर लगाया, उसी वर्ष महाराजा उम्मेदसिंह ने भारत के किसी देशी रजवाड़े में पहले उड्डयन विभाग की स्थाप

    Read More
  • राजस्थान की लोक संगीत परम्परा एवं प्रमुख लोक गीत

     07.06.2017
    राजस्थान की लोक संगीत परम्परा एवं प्रमुख लोक गीत

    बिना राजस्थान आये यदि कोई व्यक्ति राजस्थान को समझना चाहता है तो वह यहाँ का लोक संगीत सुन ले। सम्पूर्ण राजस्थान सुरीली स्वर लहरियों में विरल होकर यहाँ के लोक संगीत में समाया हुआ है। लोक संगीत की यह धारा दो रूपों में प्रवाहित हुई है। एक तो जन साधारण द्वारा सामाजिक उत्सवों, जन्म, विवाह, स्वागत, विदाई, संस्कार,

    Read More
  • महान राजाओं ने जोधपुर को बसाया और संवारा

     21.08.2017
    महान राजाओं ने जोधपुर को बसाया और संवारा

    जोधपुर को बसाने वाला राव जोधा बड़े जीवट वाला राजा था। उसने 12 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ रणक्षेत्र में रहकर शत्रुओं से लड़ाई लड़ी। 1438 इस्वी में जब उसके पिता रणमल की मेवाड़ में हत्या हुई, तब जोधा अपने सात सौ राठौड़ वीरों को लेकर चित्तौड़ से जोधपुर की ओर चल दिया। मेवाड़ की सेना ने राठौड़ों का पीछा किया किंत

    Read More
  • अंग्रेज देते थे राजाओं को तोपों की सलामी

     07.06.2017
    अंग्रेज देते थे राजाओं को तोपों की सलामी

    मुगलों के आगमन से पूर्व राजपूताना में 11 राज्य थे- मेवाड़, मारवाड़, आम्बेर, बीकानेर, जैसलमेर, सिरोही, अजमेर, बूंदी, बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं करौली। मुगलों के काल में राजपूताना में 7 नये राज्य अस्तित्व में आये- कोटा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, किशनगढ़, प्रतापगढ़ तथा शाहपुरा जबकि एक राज्य- अजमेर समाप्त हो गया। इस प्रकार

    Read More
  • पश्चिमी राजस्थान में आयुर्वेद तथा पुरातत्व को पर्यटन का प्रमुख आधार बनाया जाये

     07.06.2017
    पश्चिमी राजस्थान में आयुर्वेद तथा पुरातत्व को पर्यटन का प्रमुख आधार बनाया जाये

    वर्तमान में पश्चिमी राजस्थान में रियासती इतिहास पर्यटन का प्रमुख आधार बना हुआ है जिसके चलते राजस्थान में आने वाले पर्यटकों को रियासत कालीन महलों, दुर्गों, हवेलियों तथा अन्य राजकीय भवनों की सैर करवाई जाती है। राजस्थान में आने वाले पर्यटकों को प्राचीन किलों तथा राजसी प्रासादों के साथ-साथ रेतीले धोरों, सं

    Read More
  • उच्च कोटि की साहित्यिक रचनाओं से समृद्ध है राजस्थानी भाषा का अलंकृत गद्य

     07.06.2017
    उच्च कोटि की साहित्यिक रचनाओं से  समृद्ध है राजस्थानी भाषा का अलंकृत गद्य

    किसी भी भाषा में साहित्य की रचना प्रायः पद्य विधा से आरम्भ होती है तथा बाद में गद्य विधा को अपनाया जाता है। यही कारण है कि राजस्थानी भाषा में ई.788 में जालोर में उद्योतन सूरि द्वारा रचित ‘कुवलयमाला’ (प्राकृत ग्रंथ) से लेकर, 12वीं शताब्दी ईस्वी में सिरोही में सिंह कवि द्वारा रचित ‘पज्जुन्न कहा’ (अपभ्रंश ग

    Read More
  • बचाना होगा भारत के पारिवारिक और सामाजिक ढांचे को

     07.06.2017
    बचाना होगा भारत के पारिवारिक और सामाजिक ढांचे को

    लंदन के लेगटम संस्थान और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने उनासी मानकों के आधार पर विश्व के एक सौ चार देशों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है। इन देशों में विश्व की नब्बे प्रतिशत आबादी रहती है और इस सूची में भारत को पैंतालीसवां स्थान मिला है। सामाजिक मूल्यों के मामले में भारत को विश्व में पहले स्थान पर रखा गया है।

    Read More
  • झालावाड़ से हर साल ढाई से तीन लाख भेड़ें मालवा प्रवास पर जाती हैं

     07.06.2017
    झालावाड़ से हर साल ढाई से तीन लाख भेड़ें मालवा प्रवास पर जाती हैं

    हजारों भेड़ों के समूह को एक निश्चित पथ का अनुसरण करते हुए देखना कम रोमांचकारी नहीं है। मारवाड़ से मालवा तक के ये सैंकड़ों यायावर भारी भरकम लाल पगडि़यों के कारण किसी बावरे अहेरी से कम नहीं लगते। हर साल वे इसी तरह गाते-गुनगुनाते मारवाड़ से मालवा की तरफ जाते हैं तथा वर्षा काल आरम्भ होते ही फिर से उन्हीं रास्त

    Read More
  • राजस्थानी कहावतें

     07.06.2017
    राजस्थानी कहावतें

    अणदोखी ने दोख, बीनै गति न मोख।

       भावार्थ- निरपराध पर दोष धरने वाले को न स्वर्ग मिलता है न मोक्ष।

    असाई म्हे असाई म्हारा सगा, बां कै टोपी न म्हारे झगा।

       भावार्थ- निर्धनों के मित्र भी निर्धन ही होते हैं।

    अभागियो टाबर त्यूहार नूं रूसै।

       भावार्थ- मंदभागी व्

    Read More
  • महिला सशक्तीकरण की मिसाल हैं झालावाड़ की बुनकर महिलाएं

     21.08.2017
    महिला सशक्तीकरण की मिसाल हैं झालावाड़ की बुनकर महिलाएं

    झालावाड़ जिले के असनावर, रायपुर, झालरापाटन, झिरी, सुनेल, मोलक्या, देवरी तथा निकटवर्ती गांवों  में 200 से अधिक बुनकर महिलाएं, महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनकर उभरी हैं। वे अपने घरों में बैठकर साड़ी, खेस, सफेद फैब्रिक, तौलिये, बुनती हैं तथा दरी, पट्टी, गलीचे एवं एक किलो वाली रजाइयां भी बनाती हैं। इस कार्य से वे प्

    Read More
Categories
SIGN IN
Or sign in with
 
×
Forgot Password
×
SIGN UP
Already a user ?
×